Trump 15% Universal Tariff: ट्रंप का बड़ा फैसला, भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर?
ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: अमेरिका लगाएगा 15% ‘यूनिवर्सल टैरिफ‘, जानें भारत समेत दुनिया पर इसका असर
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। हालिया घोषणा के अनुसार, ट्रंप प्रशासन बहुत जल्द सभी आयातित वस्तुओं पर 15% ‘यूनिवर्सल टैरिफ‘ (Universal Tariff) लागू करने जा रहा है। यह फैसला फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (SCOTUS) द्वारा ‘आपातकालीन शक्तियों’ पर लगाई गई रोक के बाद एक नए कानूनी दांव-पेंच के रूप में देखा जा रहा है।
कानूनी आधार: ‘सेक्शन 122′ का इस्तेमाल
फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की उन शक्तियों को सीमित कर दिया था, जिसके तहत वे आपातकाल का हवाला देकर मनमाना शुल्क लगाते थे। इसके जवाब में, अब ट्रंप प्रशासन ने ‘ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122′ का सहारा लिया है।
- संतुलन बनाने की कोशिश: यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि यदि देश का व्यापार घाटा (Balance-of-Payments) बहुत बढ़ जाए, तो वे 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% तक का सार्वभौमिक शुल्क लगा सकते हैं।
- अस्थाई ब्रिज: वर्तमान में इस 15% शुल्क को एक ‘ब्रिज’ (अस्थाई व्यवस्था) माना जा रहा है, जब तक कि सरकार लंबी अवधि के लिए नए व्यापार नियम तय नहीं कर लेती।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह स्थिति काफी जटिल है। भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक दोहरी चुनौती पेश कर सकता है:
- अनिश्चितता: भारत से अमेरिका जाने वाले कई उत्पादों पर पहले से ही अलग-अलग शुल्क दरें थीं। अब 15% के इस नए ‘यूनिवर्सल रेट’ के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि पुराने समझौते प्रभावी रहेंगे या नया रेट लागू होगा।
- उच्च स्तरीय वार्ता: इसी हफ्ते (20-22 अप्रैल) भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की है। भारत की कोशिश है कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कपड़ा और फार्मा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को इस भारी टैक्स से राहत दिलाई जा सके।
वैश्विक प्रतिक्रिया और छूट
जहाँ एक ओर अमेरिका अपने घरेलू उद्योगों को बचाने की दलील दे रहा है, वहीं दुनिया के अन्य देशों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है:
- कनाडा और मेक्सिको: USMCA समझौते के कारण इन देशों को काफी हद तक छूट मिलने की उम्मीद है।
- यूरोपीय संघ (EU): यूरोपीय देशों ने फिलहाल ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनाई है। जून में होने वाली बैठक में वे जवाबी कार्रवाई पर फैसला ले सकते हैं।
- ब्रिटेन: ब्रिटेन ने अपने स्टील और दवा उद्योगों के लिए कुछ विशेष रियायतें हासिल करने में सफलता पाई है।
आगे की राह: जुलाई का समय है बेहद अहम
यह 15% टैरिफ फिलहाल केवल 150 दिनों के लिए वैध है, जिसकी समय सीमा 24 जुलाई 2026 के आसपास समाप्त हो रही है। यदि अमेरिकी संसद (Congress) इसे आगे नहीं बढ़ाती है, तो ट्रंप प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा (Section 232) जैसे अन्य कड़े कानूनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी, बल्कि अमेरिका में भी महंगाई बढ़ने की आशंका है। भारत जैसे रणनीतिक साझेदार के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपनी व्यापारिक नीतियों में क्या बदलाव करता है।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
- ट्रंप प्रशासन का नया लक्ष्य: 15% यूनिवर्सल टैरिफ।
- कानूनी आधार: ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 122।
- अवधि: शुरुआती 150 दिनों के लिए प्रभावी।
- प्रभाव: भारत के निर्यात और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा पर असर।