अलीगढ़ में दो सिर, दो हाथ और चार पैर वाले कंजॉइंड ट्विन्स का जन्म; मां सदमे में चली गईं, डॉक्टरों ने बताया ‘अत्यंत जटिल मामला’
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक दुर्लभ और हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। यहां एक महिला ने दो सिर, दो हाथ और चार पैर वाले जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे ‘कंजॉइंड ट्विन्स’ कहा जाता है। जन्म के बाद मां को बच्चों की स्थिति देखकर इतना गहरा सदमा लगा कि उनकी जान नहीं बच सकी।
17 मार्च 2026 को सासनी गेट क्षेत्र के बिहारी नगर निवासी आकाश कुमार की पत्नी नीरू को प्रसव पीड़ा हुई। उन्हें जिला महिला अस्पताल (जिला महिला अस्पताल) में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान इन जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। बच्चों में दो अलग-अलग सिर, दो हाथ, चार पैर और एक साझा धड़ है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों बच्चे छाती के हिस्से से जुड़े हुए हैं।
बच्चों की हालत स्थिर, आगे की जांच जारी
जन्म के तुरंत बाद दोनों बच्चों ने रोना शुरू कर दिया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सांस, दिल की धड़कन और अन्य जरूरी पैरामीटर लगातार मॉनिटर किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की टीम ने बच्चों को विशेष निगरानी में रखा है और आगे की जांच के लिए विशेषज्ञों को रेफर कर दिया है।
अस्पताल की डॉक्टर मेघा वार्ष्णेय ने बताया, “यह मामला बेहद जटिल है। दोनों बच्चे छाती के हिस्से से जुड़े हुए हैं। उनके अंगों की स्थिति का आकलन अभी बाकी है। यह जानना बेहद जरूरी है कि दोनों बच्चों के दिल, फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंग अलग-अलग हैं या साझा।”
डॉक्टरों का कहना है कि चिकित्सा विज्ञान में ऐसे मामलों में सर्जरी के जरिए बच्चों को अलग करना संभव हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह अंगों के जुड़ाव पर निर्भर करता है। अगर दिल और फेफड़े अलग-अलग हैं तो सर्जरी की संभावना मजबूत है। शुरुआती कुछ दिन बच्चों के लिए बेहद अहम हैं।

मां की मौत, परिवार में मातम
नीरू की हालत प्रसव के बाद शुरू में सामान्य थी, लेकिन जब उन्हें बच्चों की असामान्य स्थिति के बारे में पता चला तो वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गईं। शाम तक उनकी स्थिति बिगड़ गई। घबराहट और असहजता के बाद उन्हें निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन डॉक्टरों के हर प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। परिवार के लिए यह खुशी का पल गहरे सदमे में बदल गया। आकाश कुमार और पूरे परिवार पर शोक की छाया छा गई है। इलाके में लोग इस घटना को ‘किस्मत का खेल’ बता रहे हैं और परिवार के प्रति गहरी संवेदना जता रहे हैं।

चिकित्सा विज्ञान में अत्यंत दुर्लभ मामला
कंजॉइंड ट्विन्स का जन्म दुनिया भर में बहुत कम देखा जाता है। ऐसे मामलों में अलग-अलग अंगों का जुड़ाव अलग-अलग हो सकता है। अलीगढ़ का यह मामला भी इसी श्रेणी में आता है। डॉक्टरों की टीम अब विस्तृत जांच के बाद ही सर्जरी की संभावना पर अंतिम फैसला लेगी।
यह घटना एक तरफ चिकित्सा विज्ञान की उन्नति की याद दिलाती है तो दूसरी तरफ जीवन की अनिश्चितता भी। जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग ने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बच्चों की सेहत और भविष्य को लेकर पूरे इलाके में प्रार्थनाएं की जा रही हैं। हमारी टीम इस मामले पर नजर बनाए हुए है। आगे कोई नई जानकारी मिलने पर अपडेट दिया जाएगा। आकाश कुमार और पूरे परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना।
भारत में अन्य दुर्लभ जन्म मामले
अलीगढ़ का यह मामला अकेला नहीं है। भारत में कंजॉइंड ट्विन्स और ऐसे दुर्लभ जन्म हर साल कई जगह देखे जाते हैं। कुछ उल्लेखनीय केस:
• महाराजगंज, उत्तर प्रदेश (जनवरी 2026): एक निजी अस्पताल में पेट से जुड़े दो सिर वाले जुड़वां बच्चे पैदा हुए। डॉक्टरों ने सफल सर्जरी की और मां-बच्चे दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे केस 2 लाख में एक बार होते हैं।
• शहडोल/अनूपपुर, मध्य प्रदेश (नवंबर 2024): वर्षा जोगी ने 2 सिर, 4 हाथ, 4 पैर और एक पेट वाले जुड़वां बच्चे को जन्म दिया। दोनों का एक ही दिल था। बच्चे को विशेष निगरानी में रखा गया।
• बिहार – लक्ष्मी तात्मा केस (2005): 8 अंगों (4 हाथ-4 पैर) वाली बच्ची का जन्म हुआ। यह पैरासाइटिक ट्विन का मामला था। बेंगलुरु में सफल सर्जरी के बाद लक्ष्मी आज सामान्य जीवन जी रही हैं।
ये सभी केस साबित करते हैं कि भारत में कंजॉइंड ट्विन्स की घटना 50,000 से 1 लाख जन्मों में एक बार होती है, लेकिन जागरूकता और बेहतर मेडिकल सुविधाओं की कमी में कई बच्चे बच नहीं पाते।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:-
Q1. कंजॉइंड ट्विन्स क्या होता है? A: जब गर्भ में दो भ्रूण पूरी तरह अलग नहीं हो पाते तो बच्चे कुछ अंगों से जुड़े रह जाते हैं। इसे कंजॉइंड ट्विन्स कहते हैं।
Q2. अलीगढ़ के जुड़वां बच्चों की सर्जरी संभव है? A: अभी जांच चल रही है। अगर दिल और फेफड़े अलग हैं तो सर्जरी की संभावना है।
Q3. भारत में ऐसे दुर्लभ जन्म कितने होते हैं? A: औसतन 50,000-1,00,000 जन्मों में एक बार। सफल सर्जरी के कई केस भी दर्ज हैं।
Q4. मां को सदमा क्यों लगा? A: बच्चों की असामान्य स्थिति देखकर मानसिक सदमा लगा, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई।The Social Times | The Social Times News | Socialtimesyt

